क़लम के कुछ सिपाही...
दिल से निकल जाती जो बात, तो बात कहाँ होती । तन्हाई में ना आती जो याद, तो मुलाक़ात कहाँ होती । --------------------------------------------- दर्द खंजर सा, सीने में सना, मालूम होता है । ज़रा लहू टपके, जाने तो सही, इश्क़ फरमाया था । ---------------------...
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Atul Mongia
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[05 Apr 2008 07:25 AM]



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