कुछ लिख पाऊँगा... कभी जाना ना था।
हम इंसान काफ़ी पेचीदा नसल के मालूम होते हैं। हम में अच्छे और बुरे, दोनों की हदें मौजूद हैं। जैसे एक भव-संसार हमारे बाहर, उतना ही अन्दर। सोच है, भाव हैं, एहसास हैं। इन एहसासों को परिभाषित करना मुश्किल है, क्योंकि हर एहसास से कई लड़ियाँ जुड़ी हैं, जो एक...
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Atul Mongia
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[05 Apr 2008 07:08 AM]



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