साँप सीढ़ी
साँप से बचकर सीढ़ी चढ़ गए , ग्यारह में वह रम गई । करती बातें वह फूलों से , पेड़ की शाखाएं सहलाती । हाथी देख दौड़ कर जाती , केले और बिस्किट वह खिलाती । उसकी शाम कभी ना आए , दिन में ही वह दिल बहलाए । जिसका सूरज ढल गया है , उसकी रात कभी ना आए । दिल में ए...
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Atul Mongia
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[05 Apr 2008 07:06 AM]



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