क़ब्र यादों की
हर ख्वाइश का अंजाम नही होता , मोहब्बत में मुकम्मल मकाम नही होता । दिल-ओ-दर्द में वक्त ही अकेला है , खालीपन के खालीपन में यादों का मेला है । देखते ही देखते झुर्रियां बढ़ जाएँगी , पुरानी थम के कुछ नई गढ़ जाएँगी । वक्त के कठ्गारे में सब साथ छोड़ जाएँगे ,...
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Atul Mongia
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[05 Apr 2008 07:03 AM]



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