क़ब्र यादों की

ATM हर ख्वाइश का अंजाम नही होता , मोहब्बत में मुकम्मल मकाम नही होता । दिल-ओ-दर्द में वक्त ही अकेला है , खालीपन के खालीपन में यादों का मेला है । देखते ही देखते झुर्रियां बढ़ जाएँगी , पुरानी थम के कुछ नई गढ़ जाएँगी । वक्त के कठ्गारे में सब साथ छोड़ जाएँगे ,... [पूरी पोस्ट]
writer Atul Mongia
views
11
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[05 Apr 2008 07:03 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix