लोगों का जुमला
काली रात में देखा था मंज़र पहले भी, दीन के उजियारे में, फ़कत, पहली बार देखा है। यूं तो जगमगाती थी रौशनी तब भी, सूरज के चौबारे में, खीची आज रेखा है। जगह की पहचान ढली, समय की ताल में, लोगों का जुमला मगर, जैसा तब था, अब भी वैसा है। बतियाते बेसबब, प्रकाश...
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Atul Mongia
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[12 Apr 2008 08:15 AM]



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