ढलती रात में सुनिये आशाजी का ये अनसुना सा गीत.
सात्विक धुनों का जादू जगाने वाले संगीतकार रवीन्द्र जैन की बंदिश है यह. राग मारवा के स्वर और आशा भोंसले की आवाज़.एक लम्हा लगता है सुनने वाले को जैसे संबोधित कर आशाजी कह रहीं है...साथी रे भूल न जाना मेरा प्यार..(फ़िल्म:कोतवाल साब) चित्रपट संगीत के दायरे...
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संजय पटेल...
रवीन्द्र जैन
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[08 Sep 2008 12:56 PM]



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