कब टूटेगी यह चुप्पी......
इंसानी जिंदगी के बदलते तौर तरीको को वक़्त के साथ साथ समाज में मान्यता मिल जाती है, लेकिन सेक्सुअल पसंद में आ रहे बदलावों पर हमारा कानून और समाज दोनों चुप हैं। हाल ही में बॉम्बे हाईकोर्ट नें माना की होमोसेक्सुएलिटी को लेकर बने कानूनों पर फिर से विचार...
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प्रशांत जैन
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[04 Sep 2008 10:42 AM]



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