खली की याद सताती है...

बकौल बेद मित्रों बैठे-बैठे बकवास हो गई तो उसे छाप दिया। कृपया पढ़कर अपनी राय से अवगत कराएं। बहुत दिन हुआ खली को देखे। मुझे उनकी याद सता रही है। भूत-प्रेत देखे भी बहुत दिन हुआ। राखी का दीदार हुए भी एक अरसा बीत गया। आकाश गंगा में हर क्षण होने वाले विस्फोट भी अब... [पूरी पोस्ट]
writer वेद रत्न शुक्ल
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[09 Oct 2008 11:40 AM]

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