खली की याद सताती है... (पुन: प्रकाशित)
मित्रों बैठे-बैठे बकवास हो गई तो उसे छाप दिया। कृपया पढ़कर अपनी राय से अवगत कराएं। बहुत दिन हुआ खली को देखे। मुझे उनकी याद सता रही है। भूत-प्रेत देखे भी बहुत दिन हुआ। राखी का दीदार हुए भी एक अरसा बीत गया। आकाश गंगा में हर क्षण होने वाले विस्फोट भी अब...
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वेद रत्न शुक्ल
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[26 Oct 2008 12:49 PM]



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