आँख मारने का चलन अब नहीं रहा

बकौल बेद आँख मारने का चलन अब नहीं रहा। यह एक किस्म की छेड़खानी थी। इसे आप प्रणय निवेदन भी कह सकते हैं। प्रेमिका के प्रति प्रेम के इजहार के लिए प्रेमी द्वारा सामान्यत: यह घटना की जाती थी। साधारणतया इसे प्रेमीजन ही आजमाते थे और प्रेमिका के इशारे का इन्तजार करते... [पूरी पोस्ट]
writer वेद रत्न शुक्ल
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[22 Nov 2008 15:30 PM]

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