व्यन्ग्य --था इश्क नहीं आसां
था इश्क नहीं आसां0प्रेम जनमेजय मेरे नाम में प्रेम शब्द अवश्य है पर मैंनें प्रेम-विवाह नहीं किया है । मैं नाम का ही प्रेम हूं । जैसे जनसेवकों से जनता, न्यायालय से न्याय, सुरक्षा कर्मियों से सुरक्षा, थाने से शिष्टाचार और पढ़ाने वालों से पढ़ाना दूर रहता...
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प्रेम जनमेजय
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[30 Oct 2008 14:04 PM]



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