व्यंग्य--हम निंदा करते है

प्रेम जनमेजय व्यंग्यहम निंदा करते हैं0 प्रेम जनमेजय हमने निदंा की है, हम निंदा कर रहे हैं और हम निंदा करते रहेंगें । जैसे-जैसे जब-जब धर्म की हानि होती है और प्रभु जन्म लेते हैं वैसे ही जब- जब इस देश में बम-विस्पफोट होता है, हममें निंदा जन्म लेती है और उसे हम करते... [पूरी पोस्ट]
writer प्रेम जनमेजय
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[30 Nov 2008 02:41 AM]

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