प्रेम जनमेजय का व्यंग्य
ओम गंदगीआय नमः आषाढ़ का प्रथम दिवस कवि कालिदास को अच्छा लगा था, मुझे भी अच्छा लगता है और मेरे साथ-साथ पूरी दिल्ली को अच्छा लगता है। पर मेरे अच्छे लगने और कालिदास के अच्छे लगने में उतना ही अंतर है जितना अंतर एक गरीब को अमीर की तुलना में न्याय मिलने का...
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प्रेम जनमेजय
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[06 Sep 2009 02:57 AM]



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