लिखाडी़

लिखाडी़ जिंदगी का सफर कैसा भी कितना भी कठोर क्यो न हो ,यह जीने वाले की इच्छा शक्ति पर निर्भर करता है कि वह उसे कैसे जिए।बच्चों की साइकिल पर सवार इन मियां जी को देखकर कोई हंसे या मजाक उड़ाए किंतु अपने ढंग से जीवन जीने वाले पर कुछ फर्क नही पड़ता। उसने अगर जीवन... [पूरी पोस्ट]
writer अशोक मधुप
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[18 Nov 2008 12:23 PM]

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