मुंबई, धर्मशाला और मै

लिखाडी़ एक हास्य व्यंग] आज मोहन लाल मिले। बहुत प्रसन्न नजर आ रहे थे। राजे महाराजों के समय की एक धर्मशाला के मैनेजर हैं। बहुत दिनों बाद उनसे मुलाकात हुई। उन्होंने कहा कि धर्मशाला में आना । आज कल उसके मोड्रनाईजेशन का काम रहा चल रहा है। मोहन लाल को अंग्रेजी बोल... [पूरी पोस्ट]
writer अशोक मधुप
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[07 Dec 2008 22:58 PM]

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