अवसरवादियों का प्रवचन
लोग कहते आए हैं की अपने गिरिवान या अपने को सही कर ले तो देश अपने आप सुधर जाएगा । लेकिन मैं अपने ४२ वें बसंत में देखा है की लोग नही सुधरे । मैं डेल्ही में १९९० के दशक में कदम रखा और संघ लोक सेवा की तैयारी में लग गया । मेरी सोंच बिल्कुल पारदर्शिता थी ।...
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सुरेन्द्र Verma
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[26 Dec 2008 00:49 AM]



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