भैरवी -तू गंगा की मौज है में जमना की धरा
राग भैरवी , भरावी थाट का राग है और यह एक अत्यन्त प्राचीन राग है । इस्कोबजाने का समय सुबह जल्दी का है , ब्रहम मुहूर्त का । मगर आजकल इसको सभी संगीत सभाओं के अंत में गाया या बजाया जाता है। अर्थात संगीत सभा का समापन राग भैरवी से ही किया जाता है। अतः अगर...
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[01 Dec 2008 12:09 PM]



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