आयेगा कौन?
पतझड़ है पीले पत्ते हैं गर्म हवा है धूप बड़ी है होठों पर मुस्कान कुटिल लेकर यह तक़दीर खड़ी है सहमा-सा है एक गीत इसे संग मेरे अब गायेगा कौन? जीवन के इस मोड़ पे तन्हा खड़ा हूं, संग आयेगा कौन? - पराग khada kabira beech-bazaar na koi bair na koi pyaar...
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parag mandle
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[23 Sep 2005 01:36 AM]



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