दुखिया दास कबीर

बीच-बजार मोह नहीं या बैर नहीं पर बांटे सबकी पीर बीच-बज़ार आ खड़ा हुआ, दुखिया दास कबीर. कर सकता है कोई सवाल कि क्यों आ खड़ा हुआ कबीर, क्या हमने पीले चावल भेज कर न्यौता दिया था? फ़िर क्यों चला आया भाई कबीरे, बिल्कुल उसी स्टाइल में जैसे हिन्दी फिल्मों की हीरोइन गाती... [पूरी पोस्ट]
writer parag mandle
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[26 Sep 2005 08:28 AM]

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