अपना शहर एक असमाप्त खोज है
शुरुआत के लिए यह एक गद्य है। कुछ कविताएं ठहरकर। बड़े शहरों का आकर्षण विचित्र है। वे लोगों को उस तरह अपनी तरफ खींचते हैं जैसे आलपिनों को कोई बड़ा चुंबक। उनकी परिधि और प्रभाव क्षेत्र में आनेवाले तमाम गांव-कस्बे उनमें धीरे-धीरे समा जाते हैं। आसपास एक निर्...
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कुमार अम्बुज
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[14 Oct 2008 04:42 AM]



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