मेरी हँसी में मेरे पिता की हँसी शामिल है।

कुमार अम्‍बुज पहल -71' में जो डायरी प्रकाशित हुई थी, उसमें से यह एक अंश यहाँ दे रहा हूँ। इसमें केवल एक पंक्ति अभी तीन महीने पहले और शामिल हुई है। शायद यह दिलचस्‍प लगे। मेरी हँसी में मेरे पिता की हँसी शामिल है। 27-06-98 रचनाशीलता में मौलिकता एक तरह का मिथ है। जिस त... [पूरी पोस्ट]
writer कुमार अम्‍बुज
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[21 Oct 2008 03:26 AM]

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