आज भी खरे हैं तालाब

नदिया बहती जाए जल संरक्षण के क्षेत्र में असाधारण काम करने वाले अनुपम मिश्र की 1993 में छपी किताब 'आज भी खरे हैं तालाब' कम असाधारण नहीं है. जाने कितनी भाषाओं में कितनी-कितनी बार इस किताब के संस्करण छपे और पानी के लिए तरसने वाले समाज को राह दिखाने का काम करते रहे. अन... [पूरी पोस्ट]
writer Geetashree
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[20 Aug 2008 15:16 PM]

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