मेघा छाए आधी रात

नदिया बहती जाए मेघा छाए आधी रात, बैरन बन गई निंदिया बता दे मैं क्या करूँ मेघा छाए आधी रात, बैरन बन गई निंदिया सब के आंगन दिया जले रे, मोरे आंगन जिया हवा लागे शूल जैसी, ताना मारे चुनरिया कैसे कहूँ मैं मन की बात, बैरन बन गयीं निंदिया, बता दे मैं क्या करूँ मेघा छाए आध... [पूरी पोस्ट]
writer Geetashree
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[20 Aug 2008 15:26 PM]

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