तैरने वाला समाज डूब रहा है

नदिया बहती जाए बाढ़ अतिथि नहीं है. यह कभी अचानक नहीं आती. लेकिन जब बाढ़ आती है तो हम कुछ ऐसा व्यवहार करते हैं कि यह अचानक आई विपत्ति है. इसके पहले जो तैयारियां करनी चाहिए, वे बिल्कुल नहीं हो पाती हैं. इसलिए अब बाढ़ की मारक क्षमता बढ़ चली है. हमारा समाज इससे खेलना जानता... [पूरी पोस्ट]
writer Geetashree
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[07 Sep 2008 05:18 AM]

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