कामना
हर कामना में विजय का आभास लिए अपने मन में एक नया विश्वास लिए है जंग बहुत लंबी दिल में जीतने की उम्मीद भरी कभी लगती है डगर सपनों वाली है माना स्वपन की भाषा खुशबू सही पर जिंदगी की भाषा तो निर्मल पानी है दोनो ही भाषा है अकल्पनीय, अकथित लेकिन दीपक कि भाष...
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अनुराग मिश्र
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[08 Dec 2007 10:20 AM]



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