Gulzar saab's new nazms on his birthday

ख़ुशबू.ए.गुलज़ार जाते जाते एक छोटी सी नज़्म आप लोगों के लियेअबे इसे पता नहीं क्या कहेंगे आप ऐसी नज़्म को...देखने में पाजी लगती है.. वैसे है नहींया फिर देखने में नहीं लगती पर है पाजी....ये बूढ़े लोग अजब होते हैंछाज में डाल केमाज़ी के दिनकंकर चुन करदांत तले रख कर उनकोफिर स... [पूरी पोस्ट]
writer Pavan
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[25 Sep 2007 19:17 PM]

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