बुढ़िया रे!

ख़ुशबू.ए.गुलज़ार हाल ही में कोवलम (केरल) में पहला कोवलम साहित्यिक समारोह आयोजित किया गया. समारोह में गुलज़ार साब ने भी शिरक़त की.. और अपनी नज़्मों से सुनने वालों की आखॊं और अन्तर्मन दोनो को भिगो दिया... खासकर उनकी नज़्म बुढिया रे से.. बुढ़िया, तेरे साथ तो मैंने,जीने... [पूरी पोस्ट]
writer Pavan
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[09 Nov 2008 16:08 PM]

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