सारी प्रिथ्वी को कागज.....
सारी प्रिथ्वी को कागज, सारी जंगल को कलम, सातों समुद्रो को स्याही, बना कर लिखने पर भी, मैं बयान नहीं कर पाऊन्गा, "आप" से " तुम " में , जितना खुशी हुई थी, उससे कई गुना ज्यादा, "तुम" से "आप" में दुख होती हैं, पर........ मैं तब भी वही था , अब भी वही हुँ...
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"Azad Sikander"
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[31 Oct 2007 07:32 AM]



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