आज मैं हिमालय की कन्दराओँ में
आज मैं हिमालय की कन्दराओँ में , जाना चाहता हुं, दुनिया दारी की मोह- जाल छौड़ जाना चाहता हुं, यहाँ ना-ना प्रकार की कृतिम सुख, खोखला दिखावा , किसी के दुःख में स्वभाविक दुःख, किसी के खुशी में हँसने की झूठी कोशिस अब बर्दास्त नहीं होता , अपने स्वाभाविक कर्...
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"Azad Sikander"
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[18 Oct 2008 08:37 AM]



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