माँ
विनय के जोशी जब धूप पसर जाती रसोईघर के बाहर मैं वहां बैठ ’अ’ से अम्मा लिखा करता माँ धुएँ के कोहरे में गुनगुनाती आटा गूंथती रोटियां बेलती और साथ ही बनाती आटे की छोटी-छोटी गोलियां फिर उन्हें आँगन में फैला देती एक-दो-तीन कई चिडियां आती चहचहाती गोलियां च...
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kavitaprayas
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[05 Jan 2009 18:06 PM]



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