"ज़िंदगी एक उत्सव"
लेफ्टिनेंट कर्नल गोपाल वर्मा ज़िंदगी एक उत्सव है, चलो ज़िंदगी का जशन मनाया जाए | सुबह किसी रोती आँख का आँसू पोंछ, शाम किसी भूखे को भरपेट खिलाया जाए| किसी मस्जिद में कोई भजन गाकर, किसी मंदिर से अज़ान लगाया जाए| कँही किसी गुरु के द्वारे पे गीता पढ़कर,...
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kavitaprayas
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[06 Jan 2009 12:32 PM]



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