वेदना विरह की

my favorite contemporary poets प्रकाश यादव "निर्भीक", अधिकारी, बैँक ऑफ़ बड़ौदा, तिलहर शाखा, जिला-शाहजहाँपुर,उ0प्र0, मो. ०९९३५७३४७३३ पहला विरह है यह पहली मिलन की, लगता है यह विरह है धरती व गगन की; खुशबू अब जाती रही अपनी चमन की, जीवन मेँ न चमक रही अब कंचन की। अकेलापन का ही दर्द अब रह... [पूरी पोस्ट]
writer kavitaprayas
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[07 Jan 2009 15:40 PM]

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