वृक्ष का संदेश
नीलू गुप्ता मानव तू दानव है बना हुआ, भूल गया तू मानवपन, भय के घनीभूत कोहरे में लिपटा सिमटा तेरा मन, मदमत्त कुंजरे की भांति बेसुध हो रौंद रहा तू मानव को, आहत तो तू होता ही नहीं , राहत है बस मिलती है तुझको| लहू से प्यास बुझाने में लगा है तू, बस लहू से...
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kavitaprayas
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[08 Jan 2009 16:37 PM]



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