स्मृतियों का चक्रव्यूह --
शकुन्तला बहादुर , कैलिफ़ोर्निया,यू.एस.ए. ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ जब भी मेरी दृष्टि खिड़की पर जाती है । मन की बगिया महक सी जाती है ।। अतीत का धुँधलापन,उजियारा बन जाता है। भूत-वर्तमान का भेद मिट जाता है ।। लाल और पीले ये, फूल हैं खिले। मुझको तो जैस...
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kavitaprayas
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[08 Jan 2009 19:30 PM]



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