विदा
मैं चल तो दूँ’) डॉ. कविता वाचक्नवी --------------------------------- आज दादी,चाचियों,बहना,बुआ ने चावलों से,धान से, भर थाल मेरे सामने ला कर दिया है, मुठ्ठियाँ भर कर जरा कुछ जोर से पीछे बिखेरो और पीछे मुड़, प्रिये पुत्री ! नहीं देखो, पिता बोले अलक्षित।...
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kavitaprayas
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[09 Jan 2009 01:51 AM]



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