नववर्ष फिर आया है

my favorite contemporary poets डा. रमा द्विवेदी एक वर्ष भी बीत गया, नया वर्ष फिर आया है, कितना खोया,कितना पाया? गणित नहीं लग पाया है। कितने पल हमसे रूठ गए, कितनी विभूतियाँ खोई हैं, कितने शूल चुभे अन्तस में, कितनी मालाएँ पिरोई हैं, मंदिर में कुछ पल बीत गए, श्मशान से कभी बुलावा है।... [पूरी पोस्ट]
writer kavitaprayas
views
10
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[09 Jan 2009 02:11 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix