प्रणय निवेदन

my favorite contemporary poets दिनेश पारते हे छंद नज़्म हे चौपाई, सुन लो मेरा उद्‍गार प्रिये तुम गीत ग़ज़ल हो या कविता, तुम ही हो मेरा प्यार प्रिये मैं काव्यचंद्र का हूँ चकोर, मैं काव्यस्वाति का चातक हूँ यह प्रणय निवेदन तुम मेरा, अब तो कर लो स्वीकार प्रिये तुम मुक्तक हो उन्मुक्त कोई... [पूरी पोस्ट]
writer kavitaprayas
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[11 Jan 2009 00:35 AM]

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