कविता

my favorite contemporary poets आर.सी.शर्मा ’आरसी’ सुबह का भूला घर आजाए शाम ढ़ले तो कविता है, मेहनतकश हाथों को फिर से काम मिले तो कविता है, मदिरालय को जाने वाला मुड़ जाए देवालय को, गंगाजल के साथ उसे हरिनाम मिले तो कविता है । आंख का खारा पानी मीठे बैन सुने तो कविता है, किसी दर्द को कि... [पूरी पोस्ट]
writer kavitaprayas
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[09 Jan 2009 17:09 PM]

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