शायरी का सफर

my favorite contemporary poets एस एन शर्मा "कमल" है ये कैसी कशिश ताजगी की इधर किसकी खुशबू से महकी हुई है सहर । जिंदगी का ये कैसा अनोखा पहर जिसमें बहने लगी शायरी की लहर। इस चमन के कभी हम परिंदे न थे ख़ुद-ब-ख़ुद `पर` खींच लाये इधर। अपनी ऐसी कोई बेबसी भी न थी चल पड़े जो कदम इस नयी राह... [पूरी पोस्ट]
writer kavitaprayas
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[15 Jan 2009 01:27 AM]

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