सोने का हिरन

my favorite contemporary poets प्रतिभा सक्सेना. काहे राम जी से माँग लिया सोने का हिरन, सोनेवाली लंका में अब रह ले सिया! वनवास लिया तो भी तो उदासी ना भया, कुछ माँगे बिना जीने का अभ्यासी ना भया! मृगछाला सोने की तो मृगतिषणा रही, तू भी जान दुखी हरिनी के मन की विथा! कहीं सोने की तू ही... [पूरी पोस्ट]
writer kavitaprayas
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[11 Feb 2009 16:09 PM]

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