बात सचमुच में निराली हो गईं
नीरज गोस्वामी http://ngoswami.blogspot.com बात सचमुच में निराली हो गईं झूट जब बोला तो ताली हो गई फेर ली जाती झुका कर थी कभी उस शरम से आंख खाली हो गई मिल गइ उनको इज़ाज़त जुल्म की अपनी तो फ़रियाद गाली हो गई इक नदी बहती कभी थी जो यहां बस गया इंसा तो नाली ह...
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kavitaprayas
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[12 Feb 2009 01:44 AM]



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