तुम याद आये

my favorite contemporary poets अनु बंसल , मिलवाकी इतिहास तू पुनः जी उठा है, नूतन एक कहानी बनकर. उम्र के अंतिम चरण में, अल्लहड़, मस्त जवानी बनकर. सहसा फडफ़डाते है जीवन पुस्तक के कुछ पिछले पन्ने. जब देखे थे, तुमने हमने, अपने कल के सुंदर सपने. बह रहा है, आज सब कुछ यादों की रवानी बनकर... [पूरी पोस्ट]
writer kavitaprayas
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[30 Mar 2009 02:28 AM]

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