एक दुआ अपने लिए !
ये कहानी है उस रास्ते पर चलने की... जो मंज़िल की तरफ जाने से पहले ही ख़त्म हो गया... इस रास्ते ने सिर्फ मंज़िल की राह ही ख़त्म नहीं की... बल्कि उम्मीदों का काफिला भी रोक दिया... सपनों को कच्ची नींद में तोड़ दिया... और रात के अंधेरे में उस वक्त भटकने...
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नीरज
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[24 Nov 2008 06:54 AM]



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