मत कर रे तकरार पड़ोसी
मत कर रे तकरार पड़ोसी। हम दोनों हैं यार पड़ोसी । चाँद यहाँ भी वैसा ही है, जैसा तेरे द्वार पड़ोसी। एक- दूसरे के दुक्खों में, रोये कितनी बार पड़ोसी। अपनी-अपनी रूहों का हम, करते हैं व्यापार पड़ोसी। रोटी-बेटी के नातों पर, मत रख रे अंगार पड़ोसी। बम का मजह...
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ओम द्विवेदी
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[01 Aug 2008 15:59 PM]



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