एकमात्र सच

जीवन के अनमोल रंग कैसे भूल जाऊं ? और क्यूँ ? मानो की जीवन का कोई मोल ही नहीं रहा। दम घुट रहा है यहाँ पे। अरे, रोको इन्हे ! रोको! कहाँ जा रहे हैं यह लोग? मुझे बहुत डर लग रहा है। फ़िर से कई नन्हे चेहरों की हँसी गुम जाएगी। ठहरो ! लगता है कहीं किसी के रोने की आवाज़ आ रही ह... [पूरी पोस्ट]
writer Piyush Aggarwal
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[01 Oct 2009 14:41 PM]

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