भगवान भरोसे
नारियल की आत्मकथा उस दिन समुद्र बहुत अशांत था; आकाश काले बादलों से घिरा हुआ था और तेज हवा के झोंके समुद्र तट से टकरा रहे थे। मैं सीधा खड़ा रहना चाहता था, पर सफल नहीं हो पा रहा था। इस उम्मीद में मैं थोड़ा नीचे भी झुक गया कि शायद इस तरह तेज हवा का झोंक...
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pratibha
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[05 Jul 2009 09:39 AM]



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