ममता
जंग बहादुर सिंह घुम्मन वृद आश्रम में करीब पैंसठ वर्ष की एक औरत को उसका बेटा दाखिल करवा गया था । रब्ब जैसा मैनेजर उसे सहारा देता हुआ एक कमरे तक ले गया । “यह चारपाई-बिस्तर आपके लिए है, मां जी । आपको यहां घर जैसी सुविधा मिलेगी । फिर भी ’गर किसी चीज़ की...
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दीपशिखा
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[28 Aug 2009 02:59 AM]



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