पुण्य

पंजाबी लघुकथा अणमेश्वर कौर “ कब आया विलायत से, भई टहल सिंह? ” “ हो गए कोई पंद्रह-बीस दिन, अपना ब्याह करवाने आया था। अब तो कल सुबह की फ्लाइट से जाना है। ” “ वाह भई वाह! टहल सिंह, जहाँ तक मुझे याद है, यह तेरी तीसरी शादी है, ” बात को जारी रखते हुए सरवण पूछने लगा, “ क... [पूरी पोस्ट]
writer दीपशिखा
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[28 Aug 2009 02:52 AM]

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