वो लड़की

भीगी गज़ल बस की खिड़की से सिर टिकाए वो लड़की, सूनी आँखों से जाने क्या, पढ़ा करती है, आंसूओं को छुपाए हुए वो अक्सर, खामोश सी खुद से ही लड़ा करती है हर बात से बेज़ार हो गयी शायद हँसी उसकी कही खो गयी शायद गिला किस बात का करे, और करे किससे, हर आहट पर उम्मीद मिटा क... [पूरी पोस्ट]
writer श्रद्धा जैन
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[29 Jun 2008 23:26 PM]

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