जीवन मृत्यु

हलफ़नामा आज मै चुपचाप बैठी सोच रही थी अपने ही भावो मे कितनी उल झ रही थी कि जिन्दगी और मौत कितनी करीब है एक संसार मे लाती है तो दुसरी ले जाती है लेकिन शमशान घाट पर ही जाकर वैराग्य क्यो जागते .है और मृत्यु पर ही सारे सगे सम्बन्धी , बिलख बिलख कर रोते क्यो है शाय... [पूरी पोस्ट]
writer shikhar
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[17 May 2008 09:38 AM]

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